हरे हरे पत्तोसे लिपटी हुई धूप
चमक उठती है,नन्ही सी
गुड़िया की आँखोमे जैसे
चमक उठता है सूरज कोई,
तमन्ना का कोई खिलौना पाकर.
ना धूप रहती है सदा,
ना सूरज की चमक
और फिर
गुड़िया भी तो गुड़िया
कहा रह पाती है हमेशा?
खिलौने बस, बदल जाते है…..
Sunday, September 16, 2007
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