Sunday, September 16, 2007

~~~ BACK TO SQUARE ONE… ~~~

धूप से हलके, हवा से पतले
पानी से उजले, कुछ ख्वाब तेरे
आते है, चले जाते है
रोशनी सी छा जाती है
पल भर के लिए…
मुस्कान जगा जाती है
पल भर के लिए…

पल भर के लिए
भूल जाते है सारे शिकवे
सारे गिले धूल जाते है
खो जाता है मन मेरा
मेरा कहा अब वो…
जैसे अब कहेती हू तुम्हारे लिए
मेरा कहा अब वो…

मेरा कहा अब वो
वो रात का आँचल, वो आँख का बादल
वो लब तेरे चंचल, वो सांसो की हलचल
सब जो मेरा था, अब वो तेरा है
तू भी तो अब … तेरा हुआ..
क्या था जो दे सकु, तुम्ही को दे दिया तुम्हे
तू भी तो अब …तेरा हुआ…

तू भी तो अब…तेरा हुआ
मेरा पास रहा क्या बाक़ी
कुछ ख्वाब तेरे, कुछ यादो की ज़ांकी
आँचल मे छोड़ गया अपने लब्ज़ो को
धूप से हल्के, हवा से पत्ले
कुछ ख्वाब तेरे, आते है, चले जाते है
धूप से हल्के, हवा से पत्ले..

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