एक दीवार हमेशा
बनी रही
दोनो के बिचमे
माहिर थे दोनो
अपने हिस्से का काम करने मे
एक इंट इसने उठाई
दूसरी उसने-
एक बार उसने
मिट्टी डाली
एक बार इसने.
पानी भी
डालने मे कोई कसर
नही छोड़ी थी दोनो ने –
दीवार को पक्की बनाने मे
माहिर थे ना दोनो
अपने हिस्से का
काम करने मे.
किसी ने जो
कोशिश की होती
एक बार
ही सही
इंट रखने से
पहेले सिर्फ़
उस तरफ़ जाने की-
शायद ,
शायद ही सही
दीवार बीच मे ना होती.
दीवार के एक
तरफ़ दुनिया होती-
दूसरी तरफ़
सिर्फ़ इस ओर उस होते-
एक साथ.
पर
दोनो ने अपना अपना कम
पूरी ईमानदारी से किया था !?
Sunday, September 16, 2007
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