Sunday, September 16, 2007

~~~ सुधार दिया था ~~~

कल रात से चाँद को उधार लिया था
और साथ मैं तारो का थोड़ा सा खुमार पिया था

हाथो की लकीरे एक-सी हो गई अपनी
कुछ इस तरह तुम पर ऐतबार किया था

बस एक पल का ही साथ दिया था तुमने
बस उस पल को मैने बेसुमार जिया था

तुम मूड गये अगले ही मोड़ पर जाने क्यू
हम ने तो सीधे रास्तो पर भी पुकार लिया था

लिखते रहे हम अपना नाम तेरे आगे - पीछे
कितनी आसानी से तुमने वो सुधार दिया था

No comments: