अजब-सी दस्ता हो गई है आज
तुजे ढूंढते ढूंढते ख़ुद को मिल गई आज
हर गली, हर मोड़ , हर शहर ढूँढा तुजे
और तेरी याद मेरे घरमे मुजे मिल गई आज
नाम बदल के रख लिया था मैने अपना
नाम के पीछे तेरी निशानी मुजको मिल गई आज
जब ढूँढा, तुजे ढूँढा, ऐसे ढूँढा
मेरे भीतर, कही मेरी मंज़िल मुजे मिल गई आज
ये खुदसे मिलने की ख़ुशी इतनी
की ढूंढते ढूंढते ही मैं भी खिल गई आज.
Sunday, September 16, 2007
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