नीला-पीला धुला - खुला आसमान होगा
खुदा के पास और क्या सामान होगा
बुलाना होगा ख़त भेजकर अब उसको भी
कल से यार भी तेरा मेहमान होगा
साथ लेकर चलना तू एक रोशनी का दिया
अब के सफ़र मे रास्ता भी खुदसे अनजान होगा
दिया जब भी देना था नाप तोल के दिया
पता नही था यू खुदा भी बेईमान होगा
यू ही जाके बैठा है मंदिर मस्जिदो मे
शायद खुदा भी ना जाने कोई इन्सान होगा
आ गया है बच्चो की ज़िलमिलाती हसी मे
उसके दिलमे भी कोई अन्छुआ अरमान होगा
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