ना जाने क्या सोचकर
हर बार
तेरे पास आ जाती हूँ
हर बार
तुजसे बिछड़ते वक़्त
गुमसूम सी हो जाती हूँ
हर बार
तू सीखा जाती है
सबक ज़िंदगी का नया
हर बार
मैं कुछ नया ढंग जीने का पाती हूँ
हर बार
तेरी पायल सी आवाज़
सुनती हू और संभल जाती हूँ
कुछ मुजको भूलने से पहले
ख़ुदको थोड़ा मिल जाती हूँ
हर बार तू सीखा देती है
पाना क्या है और खोना क्या
हर बार-
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment